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त्याग आज किया है उसे बताने का त्याग करें, आत्म संतोष मिलेगा। मुनि श्रमण सागर जी

 राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला। 

त्याग आज किया है उसे बताने का त्याग करें, आत्म संतोष मिलेगा। मुनि श्रमण सागर जी


 राघौगढ़ 15 सितंबर। युग दृष्टा इस सदी के महान संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, महा तपस्वी, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने श्रमण धारा प्रवचन माला में आज राघौगढ़ में विशाल धर्म सभा में "एक रुपए की पांच चवन्नी बनाना" विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा जैन समाज के बारे में कहा जाता है कि एक रुपए की पांच चवन्नी बनाना बनिया गिरी है। आपने कहा आप अपना हित इसमें देखते हो कि हमें कैसे लाभ प्राप्त हो। आपको यह सिखाना है कि धार्मिक दुकान में आत्म कल्याण की कमाई कैसे हो। 

मुनिराज ने कहा दुनिया में अनेक प्रकार के लोग होते हैं। पहले वे होते हैं जिनके पास कुछ नहीं है और भी कुछ दान करते भी नहीं है। दूसरे वे हैं जिनके पास पैसा खूब है। उनको हम ऐसे गरीब कह सकते हैं कि जिनके पास पैसे के अलावा कुछ नहीं है। तीसरे प्रकार के वे लोग होते हैं जिन्हें नाम का मात्र भी दान नहीं करना और ख्याति पूरी चाहिए। इसका उदाहरण देते हुए आपने कहा एक सेठ जी ने मंदिर प्रांगण में कुआ निर्माण के लिए आधी ईट दान दी। जब उनके समाधि आए तो उनसे कहा इस कुएं के निर्माण में हमने आधी ईटें दान दी हैं। चीन में 28 ग्राम सोने से 50 किलोमीटर लंबा इतना पतला तार बनाया जो मकड़ी के जाल से भी पतला था। उसे पतले तार पर जापान ने छेद बना दिया। हम भारतीयों की स्थिति यह है कि हमने उस पतले तार की पैकिंग पर मेड इन इंडिया लिख दिया। आपने प्रवचन करते हुए कहा चौथे प्रकार के वह व्यक्ति होते हैं जो दान जी भर कर देते हैं। मगर दान ख्याति लाभ के लिए नहीं देते हैं। आपने दिल्ली के लाला हरसुख लाल जी का उदाहरण देते हुए कहा उन्होंने सन 1860 में चांदनी चौक पर विशाल जैन लाल मंदिर का निर्माण कराया। उस मंदिर की सीढ़ियां आम लोगों से दान लेकर बनाई और बाद में समाज से कह दिया कि इस मंदिर में मेरा कुछ नहीं है यह मंदिर समाज का है।

            मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने आगे कहा आप जो गुप्त दान करते हो वह एक न एक दिन अवश्य उजागर हो जाता है। काव्य में व्याख्या करते हुए कहा "कब तक छुपी रहेगी अमियां पत्तों की आड़ में एक दिन बिकने आएगी बाजार में। प्रेरणा देते हुए कहा त्याग के प्रचार का भी त्याग करें। ‌ प्रवचन के समापन में मुनिराज ने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज को समर्पित कविता सुनाई है वेहिसाब दम अपने पास जो दौलत है वह सब गुरुदेव की बदौलत है। 

                 जैन समाज राघौगढ़ के कार्यक्रम संयोजक एवं मंच संचालक विकास कुमार जैन ने जानकारी दी। दिनांक 16 सितंबर से 10 दिवसीय दस लक्षण पर्व के अवसर पर मुनि श्रमण सागर जी, मुनि ओंकार सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में 10 दिन के विद्याधर अनूठे शिविर में 15 वर्ष से 30 वर्ष तक के 20 युवा भाग ले रहे हैं जो देश के विभिन्न भागों से आए हैं। इसके साथ ही श्रावक, श्राविकाओं के लिए श्रमण संस्कार शिविर का आयोजन किया है जिसमें लगभग  110 शिविरार्थी उत्साह से भाग ले रहे हैं। प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे ध्यान योग, 5:45 बजे गुरु भक्ति, 6:15 बजे से अभिषेक शांति धारा एवं सामूहिक पूजन प्रातः 8:30 बजे से मुनि श्रमण सागर जी महाराज के 10 लक्षण धर्म पर प्रवचन। दोपहर 1:30 बजे से इस्टोपदेश ग्रंथ की कक्षा, तत्पश्चात तत्वार्थ सूत्र का सामूहिक वाचन, तत्पश्चात इस्टोपदेश की कक्षा, शाम 6:00 से गुरु भक्ति रात्रि 7:30 बजे से संगीतमय सामूहिक आरती, भजन संध्या एवं रात्रि 8:15 बजे से सांगानेर से पधारे पंडित अंकित शास्त्री जी के मंगल प्रवचन होंगे। इस अवसर पर गोटेगांव से सुश्री अंकिता जैन संगीत पार्टी के साथ राघौगढ़ पधारी हैं।

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