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क्रोध को हवा में उड़ाने का हुनर सीखने की आवश्यकता। मुनि श्रमण सागर जी

 उत्तम क्षमा धर्म पर मंगल प्रवचन 

क्रोध को हवा में उड़ाने का हुनर सीखने की आवश्यकता।        मुनि श्रमण सागर जी 

श्रवण संस्कार शिविर का भव्य शुभारंभ।


 राघौगढ़ 16 सितंबर। जैन धर्म के दस लक्षण महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म पर मंगल प्रवचन करते हुए महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता  बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा, करना है तो गुस्से पर गुस्सा करो, गुस्सा करने वाले पर नहीं। क्रोध मूर्खता से उत्पन्न होता है ।जिस समय क्रोध आता है आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। अगर क्रोध पर नियंत्रण नहीं किया तो जिंदगी भर क्रोध के कारण दुख सहना पड़ेगा। मुनिराज ने एक परिवार का उदाहरण देते हुए कहा उस परिवार में लॉटरी में एक लाख रुपए मिले। बेटा छोटा  अबोध था। उसने एक गड्डी चूल्हे में डाल दी। बेटे की गलती देखकर मां ने बेटे को चूल्हे से जलती लकड़ी निकाल कर  जला दिया। वह लड़का कुछ देर में मर गया। गुस्से में मां ने बेटे की हालत देखकर दूसरी गड्डी भी चूल्हे में डाल दी। यह देखकर पति को क्रोध आया और उसने जलती लकड़ी से पत्नी को जलाकर मार दिया और वह व्यक्ति स्वयं भी परिवार के साथ मर गया। क्रोध के कारण परिवार नष्ट हो जाते हैं। परिवार जीवन भर दुखी हो जाता है। आपने यह भी कहा समझदार व्यक्ति वह होता है जो अपने ज्ञान से कम और पड़ोसी के अनुभव से ज्यादा सीखना है धर्म सभा में आपने सभी को आव्हान किया कि अस्पताल के अग्नि पीड़ित उपचार वार्ड के खाली पलंग का फोटो खींचकर अपने घर पर लगाये।उस फोटो को देखकर यह आभास होगा कि अगर हमने क्रोध पर  नियंत्रण नहीं किया तो एक दिन हमारी भी वही स्थिति होगी। हमें आज के ही दिन उत्तम क्षमा धर्म को धारण नहीं करना है बल्कि 365 दिन उत्तम क्षमा को धारण करने का यह पर्व है। 

                   राघौगढ़ में चातुर्मास कर रहे मुनि श्रमण सागर जी, मुनि ओंकार सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में दस लक्षण महापर्व के पावन अवसर पर 20 युवक जिनकी आयु 15 से 30 वर्ष है उन्हें 10 दिन के विद्याधर बनाकर धर्म साधना करने का अनूठा प्रयास किया जा रहा है। 

इनमें 16 युवक देश के विभिन्न नगरों से आये हैं।4 युवक राघौगढ़ के हैं।साथ ही श्रावक श्राविकाओं को श्रमण संस्कार शिविर के माध्यम से लगभग 110 को धार्मिक संस्कार मुनि संघ के पावन सानिध्य में दिए जा रहे हैं। दस लक्षण पर्व के शुभारंभ के अवसर पर प्रातः 5 से ध्यान की क्लास, 5:45 बजे गुरु भक्ति, 6:15 बजे से भगवान का अभिषेक शांति धारा एवं सामूहिक पूजन हुई, सभी मांगलिक क्रियाएं श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से पधारे अनिकेत शास्त्री जी ने संगीत की सुमधुर ध्वनि के बीच संपन्न करायी।गोटेगांव से सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुश्री अंकिता जैन संगीत पार्टी के साथ पधारी हैं। शिविर के पुण्यार्जक परिवार सिंघई अशोक कुमार राजेश कुमार अमित कुमार भारिल्य परिवार ने मुनि द्वय के चरणों में श्री फल भेंटकर आशीर्वाद लिया।

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