श्रमण संस्कार शिविर का समापन
राघौगढ़ का प्राकृतिक सौंदर्य कश्मीर से कम नहीं। मुनि श्रमण सागर जी
राघोगढ़ 26 सितंबर। दह लक्षण महापर्व के पावन अवसर पर दिनांक 16 सितंबर से 25 सितंबर तक मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में राघौगढ़ में चल रहे 10 दिन के विद्याधर शिविर एवं श्रमण संस्कार शिविर का आज विदाई समारोह के साथ समापन हुआ। विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य महा तपस्वी औजस्वी वक्ता मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा गत दिवस हमने 20 विद्याधरों एवं 40 शिवरार्थियों के साथ राघौगढ़ के समीप जंगल में साधना की। हम जंगल में जिस स्थान पर पहुंचे थे वहां झरने वह रहे थे। झील पानी से भरी हुई थी। पेड़ पौधे हरे भरे थे। यह अनूठा प्राकृतिक देश दृश्य देखकर हम कह सकते हैं कि राघौगढ़ का प्राकृतिक सौंदर्य भी कश्मीर से कम नहीं है। महाराज जी ने कहा हम प्राकृतिक सौंदर्य के बीच जंगल में शिवरार्थियों के साथ धर्म साधना करने गए थे। हम पिकनिक मनाने नहीं गए थे। हमें बताया है कि इन स्थलों को मौज मस्ती के लिए पिकनिक स्पॉट बना दिया है। हमें तो आत्म कल्याण करना है वहां पर हमें जो आत्मीय शांति मिली वह अनूठी और अद्वितीय थी। प्राचीन काल में भी साधु संत जंगल में एकांत में रहकर साधना करते थे।
दस दिवसीय श्रवण संस्कार शिविर का समापन समारोह मुनिराज के पावन सानिध्य में आयोजित किया गया। जैन समाज के यशस्वी अध्यक्ष अशोक कुमार भारिल्य के नेतृत्व में ट्रस्ट कमेटी के पदाधिकारियों एवं मार्गदर्शक मंडल के सदस्यों ने देश के विभिन्न भागों से आए 20 विद्याधरों एवं शिविर में भाग लेने वाले 40 शिविरार्थियों का माला पहनाकर, दुपट्टा पहनाकर कर सम्मान प्रतीक देकर सम्मान किया।
जानकारी दी है दिनांक 27 सितंबर रविवार को राघौगढ़ नगर में जैन विमानोत्सव धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जयपुर से बनकर आए नवीन रजत विमान में भगवान को विराजमान कर शोभायात्रा गाज बाजे से प्रातः 10 बजे पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ होगी। नगर भ्रमण करते हुए दोपहर 2 बजे शोभा यात्रा संत सुधा सागर धाम स्थित संभवनाथ जिनालय पहुंचेगी। जहां भगवान का अभिषेक शांति धारा फूलमाल के बोलियो के माध्यम से पात्रों का चयन किया जाएगा। इस अवसर पर मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन भी होंगे। जैन समाज राघौगढ़ द्वारा सभी के सामूहिक भोज की भी व्यवस्था की गई है। नगर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है।विमानोत्सव पर आसपास के नगरों एवं ग्रामों से जैन धर्मावलंबी राघौगढ़ पधारेंगे।
