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जो प्राप्त है वही पर्याप्त है इस सूत्र को सुखी जीवन का आधार बनाये । मुनि श्रमण सागर जी

 राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला 

जो प्राप्त है वही पर्याप्त है इस सूत्र को सुखी जीवन का आधार बनाये । मुनि श्रमण सागर जी 


राघौगढ़ 1 सितंबर। दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर जी महाराज के प्रिय शिष्य महान तपस्वी बुंदेली महाकवि औजस्वी वक्ता मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला के अंतर्गत  "अच्छे दिन कैसे आए" इस विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा  वर्तमान में आदमी अपने से सामने वाले को देखकर दुखी हो रहा है। सारी दुनिया ऊंचा उठने के लिए अनुचित साधनों को अपना कर भी सुखी नहीं हो पा रही है। 

                           मुनिराज ने कहा दुनिया में चार परिवार प्रकार के लोग होते हैं पहले वह हैं जिनके पास कुछ नहीं है वह खुश भी नहीं हैं इस श्रेणी में गरीब भिखारी आते हैं। दूसरे वह लोग हैं जिनके पास कुछ नहीं है वह खुश हैं इस श्रेणी में साधु एवं मुनिगण के साथ ही मजदूर आते हैं जो दिनभर मजदूरी कर खुश रहते है। तीसरी श्रेणी में वह लोग आते हैं जिनके पास सब कुछ है और वह खुश हैं इस श्रेणी में वे लोग आते हैं जो धनवान है  और नियम धर्म से चलकर जीवन यापन पन कर रहे हैं और खुश हैं। इस श्रेणी में गिने चुने लोग ही आते हैं। चौथी श्रेणी में वह लोग आते हैं जिनके पास बहुत कुछ है मगर है खुश नहीं है, सुखी नहीं है। इस श्रेणी में वह लोग आते हैं जो अति महत्वाकांक्षी हैं। सामने वाले की बराबरी करना चाहते हैं। मुनिराज ने उदाहरण देते हुए कहा एक व्यक्ति अपने से आगे वाले को देखकर इसलिए दुखी था उसके पैरों में हजारों के जूते हैं वह व्यक्ति थोड़े आगे बढ़ा तो उसे एक ऐसा व्यक्ति मिला जिस जिसके पैर ही नहीं थे। आपने कहा सुखी रहने के लिए अपने से नीचे वाले को देखो। नीचे वाले को देखने से हमें इस बात का संतोष होगा कि हमें जो मिला है वह ही पर्याप्त है। 

हमें जो मिला है उसका आनंद लो जो नहीं मिला है उसके लिए दुखी मत होओ। आपने प्रवचन करते हुए कहा हमें जो मिला है उसका स्वाद नहीं ले रहे हैं। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने प्रवचन के समापन अवसर पर उनके द्वारा लिखित प्रेरणादायी कविता सुनाई कविता का शीर्षक है "कभी न कहो अपने दिन खराब है।"

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