राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला
जीवन को फटा बांस नहीं, सुमधुर बांसुरी बनाएं मुनि श्रमण सागर जी
5 अक्टूबर को हिंदूपत पब्लिक स्कूल में प्रेरक प्रवचन होंगे।
राघौगढ़ 2 अक्टूबर। दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य, महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने हम "बांसुरी की तरह कैसे बने" इस विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए विद्यासागर सभागार राघौगढ़ में धर्म सभा में कहा फटा बांस बनोगे तो सर्कस के जोकर के हाथ में रहोगे। बांसुरी बनोगे तो श्री कृष्ण के मुख की शोभा बनोगे। आपने क्या कहा बांस के एक ही पेड़ से एक टुकड़े को चीर देने से फटा बांस बन जाता है। जिसकी आवाज किसी को अच्छी नहीं लगती। इसी पेड़ के एक टुकड़े से बांसुरी बनती है। उसकी आवाज सभी को मधुर लगती है। और सभी के प्रिय होती है। मुनिराज ने बांसुरी की पांच विशेषताएं बताते हुए कहा पहला गुण है उसकी आवाज मधुर निकलती है। दूसरा गुण है उसमें गांठ नहीं होती है। तीसरा गुण है जब बजाओगे तभी बजेगी। चौथा है उसमें छेद होते हैं वह छेद उसके दुर्गुण नहीं है सुगुण है। पांचवा गुण है बांसुरी टूट भी जाए तो चूल्हे में जलने लकड़ी का काम करती है।
मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने प्रेरणा दी कि फटा बांस न बनकर बांसुरी बनें। बांसुरी के सभी पांच गुणों को अपनाये। सभी से सुमधुर वाणी में बोलें। जीवन में किसी से गांठ पड़ जाए तो उस गांठ को सुलझाकर खोलें, गांठ पर कैंची न चलाएं। बांसुरी के समान जब आवश्यक हो तभी बोले। बांसुरी के छेदों का अनुशरण कर दुर्गुणों को त्याग कर सुगुण अपनाये। मुनिराज ने कहा जिस तरह बांसुरी टूट जाने पर लकड़ी बनकर चूल्हे में जलने की काम आती है। उससे प्रेरणा लेकर हमें हमारे जीवन में हमारे शरीर के अंगों को दान करना चाहिए। नेत्रदान, रक्तदान, किडनी दान आदि देकर दूसरों का जीवन बचाना चाहिए। आपने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के कथन का उल्लेख करते हुए कहा हमारा जीवन तो बांसुरी है मगर हमें बजाना नहीं आता है। जिन गांठों को कोशिशों से खोला जा सकता है उन पर कैंची न चलाएं। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा मेरी प्राथमिक शिक्षा आज से लगभग 35 वर्ष पूर्व शासकीय हिंदी माध्यम के स्कूल में हुई है। इसी कारण मुझे हिंदी का ज्ञान है हमारी मातृभाषा हिंदी भावों को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। यह विशेषता अंग्रेजी सहित दुनिया की किसी भाषा में नहीं है।
प्रकृति मानव सेवा संस्थान राघौगढ़ के संचालक मंडल के सदस्य एवं भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक विजय कुमार जैन ने बताया है आगामी 5 अक्टूबर को सोमवार को मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज प्रातः 8:30 बजे हिंदूपत पब्लिक स्कूल राघौगढ़ पधार रहे हैं। उनके प्रेरक प्रवचन शिक्षकों एवं छात्रों के बीच होंगे।
