भाषाई कौशलों के प्रयोग से कक्षा शिक्षण को बनाएं गुणवत्तापूर्ण – श्री तुलसीदास दुबे
पीएम श्री विद्यालयों के शिक्षकों का डाइट में प्रशिक्षण प्रारंभ
गुना
विद्यार्थियों को भाषा शिक्षण कराते समय यह आवश्यक है कि वे केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि समझ के साथ पढ़ें और पढ़े हुए को अपने अनुभवों से जोड़कर अभिव्यक्त कर सकें। वे उस पर प्रश्न पूछ सकें, उत्तर दे सकें तथा यह भी बता सकें कि उन्हें क्या अच्छा लगा और क्या नहीं। ये सभी प्रक्रियाएं विद्यार्थियों में सोचने, प्रतिक्रिया देने और रचनात्मकता विकसित करने में सहायक होती हैं।
उक्त विचार विषय विशेषज्ञ एवं व्याख्याता श्री तुलसीदास दुबे ने डाइट बजरंगगढ़ में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के निर्देशानुसार प्रारंभ हुए पीएम श्री विद्यालयों के सामाजिक विज्ञान एवं हिंदी भाषा शिक्षकों के प्रशिक्षण शिविर के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य श्याम कुमार वशिष्ठ द्वारा मां सरस्वती के पूजन-अर्चन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। प्रशिक्षण में जिले के 14 पीएम श्री विद्यालयों के शिक्षक भाग ले रहे हैं।
श्री दुबे ने कहा कि कक्षा में भाषा शिक्षण की प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों में सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने चारों भाषाई कौशलों का समुचित विकास होना चाहिए। साथ ही, उन्हें कविता और कहानी को अपने अनुभवों से जोड़कर समझने, तर्क करने, प्रश्न बनाने और मौलिक लेखन करने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा कि कक्षा शिक्षण के दौरान पुस्तकों के माध्यम से ऐसे अवसर निर्मित किए जाएं, जिनसे विद्यार्थी सुनकर समझने, अनुमान लगाने, संवाद गढ़ने तथा तर्कों की जांच करने में सक्षम बनें। ये कौशल न केवल कक्षा में बल्कि उनके व्यवहारिक जीवन में भी उपयोगी सिद्ध होंगे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 27 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण में गजेंद्र सेमिल, गिरिजेश स्वामी, डॉ. गोविंद सिंह मीणा, अरुण नामदेव, विजयकांत राठौर एवं सुनील कुमार शर्मा भी प्रशिक्षक के रूप में सहभागिता कर रहे हैं।
