*ऑपरेशन मुस्कान के तहत गुना पुलिस की सतत् कार्यवाही*
बमौरी थाना पुलिस ने लापता नाबालिग बालिका को सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया
गुना पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल के संवेदनशील एवं कुशल नेतृत्व में जिले में संचालित ऑपरेशन मुस्कान के तहत गुना पुलिस द्वारा अपहृत एवं गुमशुदा नाबालिग बालक-बालिकाओं की खोजबीन हेतु लगातार प्रभावी एवं मानवीय कार्यवाहियां की जा रही हैं । इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मानसिंह ठाकुर के मार्गदर्शन एवं एसडीओपी गुना श्री विवेक अष्ठाना के पर्यवेक्षण में बमौरी थाना प्रभारी निरीक्षक दिलीप राजौरिया और उनकी टीम द्वारा एक सराहनीय सफलता अर्जित करते हुए थाना क्षेत्र से लापता नाबालिग बालिका को सुरक्षित दस्तयाब कर उसके परिजनों से मिला दिया गया ।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 17 जनवरी 2026 को बमौरी थाने में एक पिता द्वारा अपनी 15 वर्षीय नाबालिग पुत्री के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी । जिस पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 12/26 धारा 137(2) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर बालिका की तलाश प्रारंभ की ।
थाना क्षेत्र से नाबालिग बालिका के लापता होने की घटना को बमौरी थाना पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए बालिका की सघनता से तलाश की गई एवं इस हेतु अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया तथा विभिन्न तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए संभावित स्थानों पर बालिका को खोजने के लगातार प्रयास किए गए । इसमें पुलिस की सतत् मेहनत एवं सूझबूझ के परिणामस्वरूप आज दिनांक 24 अप्रैल 2026 को बालिका के संबंध में पुख्ता जानकारी प्राप्त होने पर बमौरी थाना पुलिस ने त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करते हुए उसे सुरक्षित दस्तयाब कर लिया गया । इसके उपरांत विधिवत कानूनी प्रक्रिया पूर्ण कर बालिका को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां समिति अध्यक्षा डॉ. नीरू शर्मा एवं सदस्यों द्वारा आवश्यक कार्यवाही करते हुए बालिका को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया । गुना पुलिस की इस मानवीय पहल से एक परिवार को उसकी खोई खुशी वापस मिल सकी है ।
पुलिस की इस सराहनीय कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक दिलीप राजौरिया, उपनिरीक्षक बुंदेल सिंह सुनेरिया, सउनि मौकम सिंह, आरक्षक माखन चौधरी, आरक्षक रवि गुर्जर, आरक्षक संजय जाट, आरक्षक दामोदर आदिवासी, आरक्षक गुलाब सिंह, महिला आरक्षक रीनू निगवाल तथा सायबर सेल से आरक्षक कुलदीप यादव एवं आरक्षक भूपेन्द्र खटीक का विशेष योगदान रहा है ।
