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प्राकृतिक खेती की ओर बढ़े गुना के किसान, बड़े कृषक एक-एक एकड़ से करें शुरुआत: कलेक्टर

 प्राकृतिक खेती की ओर बढ़े गुना के किसान, बड़े कृषक एक-एक एकड़ से करें शुरुआत: कलेक्टर


इंटीग्रेटेड फार्मिंग, पशुधन और आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी 


किसानों की आय; कृषकों ने लिया प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प



गुना 


सबमिशन ऑफ एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) योजना के अंतर्गत विश्व पर्यावरण दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मध्य जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से प्राकृतिक कृषि आधारित कृषक संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, आरोन में किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जिले के बड़े किसान एक-एक एकड़ भूमि से इसकी शुरुआत करें। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक वर्ष में उत्पादन कुछ कम हो सकता है, लेकिन समय के साथ मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, उत्पादन स्वास्थ्यवर्धक होगा और उत्पादकता में भी सुधार आएगा।


प्राकृतिक खेती से मिट्टी होगी स्वस्थ, मिलेगा दीर्घकालिक लाभ


कलेक्टर श्री कन्याल ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि जिले के किसान अब अधिक जागरूक और समझदार होते जा रहे हैं। उन्होंने उपस्थित किसानों से पूछा कि कितने किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं तथा इसके अनुभव साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 60 कृषि सखियां 30 सेक्टरों में कार्य कर रही हैं, जो किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गुना जिले में लगभग 3.50 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि है और यदि चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती को अपनाया जाए तो इसके व्यापक सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।


सिक्किम का उदाहरण देकर किसानों को किया प्रेरित


कलेक्टर ने कहा कि सिक्किम देश का ऐसा राज्य है जहां पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती की जाती है। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए बताया कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और विविधीकरण के कई सफल उदाहरण मौजूद हैं। कुछ किसान सब्जी उत्पादन से सालाना पांच लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं, वहीं थाई पिंक अमरूद की खेती से आठ लाख रुपये तक और पॉलीहाउस में गुलाब उत्पादन से कुछ कृषक 15 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक कमा रहे हैं।


इंटीग्रेटेड फार्मिंग ही भविष्य की खेती


उन्होंने कहा कि अब समय केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रहने का नहीं है। किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल अपनाते हुए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहिए तथा पशुधन को भी खेती का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। इससे लागत कम होगी, आय के स्रोत बढ़ेंगे और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार होगा जब किसानों की आय में निरंतर वृद्धि होगी और कृषि अधिक समृद्ध बनेगी।


कृषकों और कृषि सखियों ने लिया संकल्प


कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कृषकों एवं कृषि सखियों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने तथा कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने का संकल्प लिया।


कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष श्री धर्मेंद्र सिकरवार, एसडीएम आरोन सुश्री मंजूषा खत्री, कृषि उपसंचालक श्री संजीव शर्मा, उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में कृषकों और कृषि सखियों ने सहभागिता की।

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