Type Here to Get Search Results !

उत्कृष्ट विद्यालय में चल रहे विज्ञान शिक्षकों के जिला स्तरीय प्रशिक्षण का एसआरजी ने किया अवलोकन

 उत्कृष्ट विद्यालय में चल रहे विज्ञान शिक्षकों के जिला स्तरीय प्रशिक्षण का एसआरजी ने किया अवलोकन


गुना, 

आर्यावर्त काल से ही भारत ज्ञान, विज्ञान का विश्वगुरु रहा है। यहां महर्षि चरक,सुश्रुत,भारद्वाज,कणाद, बरहमिहिर,आर्यभट्ट जैसे अनेक महान वैज्ञानिक अपने विराट गुरुकुलों और नालंदा,तक्षशिला,जैसे विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं में देश विदेश के विद्यार्थियों को प्रायोगिक विज्ञान में दक्ष कर लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त करते रहे हैं। राष्ट्रहित में आज यही महान भूमिका विज्ञानशिक्षकों को निर्वहन करनी होगी। भारतीय ज्ञान विज्ञान के पुनरोदय हेतु राष्ट्रीय शिक्षानीति 2020 इसी संकल्प की पूर्ति हेतु तैयार की गई है। जिसमें प्रथम प्राथमिकता करके सीखने को दी गई है। इसके लिए ही शासन द्वारा हायर सेकंडरी के विज्ञान शिक्षकों को प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उक्त बात आज उत्कृष्ट विद्यालय में डाइट बजरंगड़ के मार्गदर्शन में चल रहे जिले के विज्ञान शिक्षकों के प्रशिक्षण का अवलोकन करने आए राज्यशिक्षा केंद्र के स्टेट रिसोर्स पर्सन, व्याख्याता डाइट  श्रीतुलसीदास दुबे ने मार्गदर्शन देते हुए कही। 


प्रशिक्षण प्रभारी प्रशांत श्रीवास्तव ने भूमिका रखी। श्री दुबे ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे अपने विद्यालयों में स्थित प्रयोगशालाओं का सम्यक रूप से नियमित उपयोग कर भारत को पुनः ज्ञान विज्ञान का विश्वगुरु बनाने में अपना भागीरथी पुरुषार्थ दिखाएं। क्योंकि वर्तमान में बड़ी संख्या में संसाधन होते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शासन की मंशानुरूप कार्य दिखाई नहीं देता है। सभी ऐसा प्रयास करें कि विद्यार्थी प्रयोगधर्मी बनकर अनुसंधान करें, ताकि वह वैज्ञानिक बनकर देश की प्रगति में सहभागी बन सके। इस हेतु शिक्षकों को सजगता और गंभीरता से विद्यार्थियों को विज्ञानमुखी बनाना होगा। प्रयोगशालाओं में नियमित प्रयोग कराने होंगे। आगामी दिनों में शासन द्वारा,निरीक्षण दल बनाकर प्रयोगशालाओं का सघन भौतिक सत्यापन किया जाएगा। क्योंकि नई राष्ट्रीय शिक्षानीति का लक्ष्य विद्यालयों में कक्षा के वातावरण, और कार्य संस्कृति में आमूलचूल परिवर्तन कर विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास करके स्वर्णिम भारत का निर्माण करना है। यह शिक्षकों की कर्तव्यनिष्ठा और प्रचंड संकल्प शक्ति से ही संभव होगा। राष्ट्रीय शिक्षानीति का बिजन भारतीय जीवनमूल्यों से विकसित ऐसी शिक्षा प्रणाली है, जो सभी को उच्चतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर भारत को वैश्विक ज्ञान की महाशक्ति बनाकर एक जीवंत और न्यायसंगत समाज का निर्माण करेगी। यह नीति शिक्षण संस्थानों की पाठ्यचर्या और शिक्षण विधि के माध्यम से विद्यार्थियों में मौलिक दायित्व,संवैधानिक मूल्य, देश से जुड़ाव और बदलते विश्व में नागरिक की भूमिका और उत्तरदायित्व की जागरूकता उत्पन्न करेगी तथा विद्यार्थियों में भारतीय होने का गर्व न केवल विचार में बल्कि व्यवहार और कार्यों में भी उत्पन्न करेगी। इस अवसर पर प्रशिक्षक सर्व श्री मनोज शर्मा, रविन्द्र कुमार तिवारी, हर्ष भूषण गुप्त, माखन सिंह मीना, राजकुमार प्रजापति उपस्थित रहे।

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.