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भाग कर विवाह करना, इस प्रवृत्ति का भारतीय संस्कृति में कोई स्थान नहीं है। मुनि श्रमण सागर जी

 राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला

भाग कर विवाह करना, इस प्रवृत्ति का भारतीय संस्कृति में कोई स्थान नहीं है। मुनि श्रमण सागर जी

श्रमण संस्कार शिविर 16 से 25 सितंबर तक।


 राघौगढ़ 10 सितंबर। इस युग के महान संत  आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, महान तपस्वी, ओजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि, विद्या कुल शिरोमणि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने राघौगढ़ नगर में श्रमण धारा प्रवचन माला के अंतर्गत "शुभ विवाह परंपरा में विकृति" विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा वर्तमान में युवक युवती पश्चात संस्कृति के प्रभाव में प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को भूलकर शुभ विवाह की परंपराओं के स्थान पर विवाह करने के अनेक तरीके अपना रहे हैं। प्रेम विवाह, वीकेंड मैरिज, लिव इन रिलेशनशिप स्वतंत्र विवाह आदि की ओर बढ़ रहे हैं। विवाह करने के नित्य नए तरीके निकाले जा रहे हैं। विवाह करने के नाम पर भोग विलासिता के यह नए-नए तरीके समाज को पतन की ओर ले जा रहे हैं। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के सुपुत्र भरत चक्रवर्ती घर में ही बैरागी थे, सुप्रसिद्ध जैन आचार्य माघनंदी महाराज मुनि दीक्षा छोड़कर गृहस्थ बन गए थे। एक दिन उन्हें याद आया कि मैंने यह क्या कर लिया। पुनः मुनि दीक्षा ली और मुनि बन गए। जैन दर्शन की एक और घटना बताते हुए आपने कहा विजय सेठ एवं उनकी पत्नी विजया दोनों ने कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष के ब्रह्मचर्य व्रत को विवाह के पूर्व लिया था आजीवन दोनों ने पति-पत्नी रहते हुए भी भाई बहन की तरह जीवन यापन किया और धर्म साधना की। मन, वचन, काय से ब्रह्मचर्य का पालन करना तलबार  की धार पर चलने के समान है। अपने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा जिस दिन भारतीय संस्कृति से विवाह पद्धति समाप्त हो जाएगी मोक्ष  का मार्ग बंद हो जाएगा। विवाह भाग कर नहीं जाग कर करो। मुनिराज ने कहा पहले युवक युवती प्रेम विवाह करते थे अब बिना विवाह के ही लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे हैं। आपने कहा लिव इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता की मांग की जा रही है।वीकेंड शादी के नाम पर युवक युवती शनिवार इतवार को साथ रहते हैं शेष दिनों में वह स्वतंत्र हैं। स्वतंत्र शादी इसलिए करते हैं कि दुनिया को दिखाने पति-पत्नी हैं मगर वह वैवाहिक जीवन में गृहस्थी नहीं बसाते हैं, स्वतंत्र रहते हैं। आपने कहा विधि विधान से मांगलिक शुभ विवाह की परंपरा समाप्त हो जाएगी तो आने वाले 25 वर्ष बाद समाज का क्या होगा। जैन मंदिरों में दर्शन करने कौंन आएगा। मुनि आर्यिका माताओं की सेवा कौंन करेगा। यह समाज के लिए विचारणीय प्रश्न है।

                            जैन समाज राघौगढ़ के कार्यक्रम संयोजक विकास कुमार जैन ने बताया है राघौगढ़ नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में दस लक्षण पर्व के शुभ अवसर पर आगामी 16 से 25 सितंबर तक श्रमण संस्कार शिविर का आयोजन किया गया जा रहा है। शिविर के पुण्यार्जक परिवार सिंघई अशोक कुमार राजेश कुमार भारिल्य परिवार का प्रवचन सभा उपरांत पगड़ी, पहनाकर, दुपट्टा डालकर, पुष्टाहार पहना कर सम्मान किया।

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