राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला
वर्तमान परिवेश में बच्चों को ज्ञानार्जन के साथ संस्कारित करने की आवश्यकता है।
मुनि श्रमण सागर जी
10 दिन के विद्याधर श्रमण संस्कार शिविर 16 सितंबर से।
राघौगढ़ 11 सितंबर। विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, महा तपस्वी, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने राघौगढ़ नगर में जारी श्रमण धारा प्रवचन माला में मंगल प्रवचन करते हुए "बच्चों को उचित मार्गदर्शन" विषय पर कहा आज की युवा पीढ़ी को ज्ञानार्जन से पहले संस्कारित करने की आवश्यकता है। बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं माता-पिता का दायित्व है कि कुम्हार की भांति कच्ची मिट्टी को परिपक्व बनाएं और अपने बच्चों को सुसंस्कारित करें। आज से लगभग 50 वर्ष पूर्व तक बेटे बेटी के विवाह 18 से 20 वर्ष की उम्र में हो जाते थे। एक जमाना था कि गांव का नाई लड़का लड़की देखकर आता था और वह आकर पूरी रिपोर्ट दे देता था। इसके बाद विवाह संबंध हो जाते थे। उस जमाने में पति-पत्नी में विवाह के बाद प्रेम होता था। अब पहले प्रेम होता है फिर विवाह होता है। दाम्पत्य जीवन में टकराव आने पर एक वर्ष में ही वैवाहिक संबंध विच्छेद हो जाता है। पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में लड़के लड़की चरित्र को दाव पर लगाकर केरियर बनाने की होड़ में लगे हुए हैं। माता-पिता का कर्तव्य है कि लड़के लड़की को इतने संस्कारित करें कि वे करियर बनाने के लिए चरित्र को दाव पर न लगाये। आपने कहा युवा पीढ़ी में संस्कार विहीनता बढ़ रही है। इसके बाद भी ऐसे उदाहरण हैं जो लड़कियां पढ़ाई कर अनेक डिग्रियां ले लेती हैं इसके बाद नौकरी करना पसंद नहीं करती हैं। वे संस्कारित लड़कियां कहती हैं मुझे ऐसा पति चाहिए जिसका स्वयं का व्यापार एवं उद्योग हो वह पति मेरे लिए महाराजा के समान होगा और मैं उसकी महारानी कहलाऊंगी।अगर नौकर से विवाह करूंगी तो नौकरानी ही कहलाऊंगी। आपने कहा बच्चों में 14 से 20 वर्ष तक की उम्र ऐसी रहती है कि इस उम्र में बच्चे भटक जाते हैं। आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने बालिकाओं को संस्कारित एवं शिक्षित बनाने के लिए प्रतिभास्थली आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना कराई है। यह प्रतिभास्थली इंदौर, जबलपुर, रामटेक महाराष्ट्र, डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में संचालित हैं यह गौरव की बात है कि जबलपुर में प्रतिभास्थली में पढ़ी एक बालिका का चयन पायलट के लिए हुआ है।मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा यह निर्णय तो माता-पिता एवं पालकों को करना है कि उन्हें अपनी संतान को राक्षस बनाना है या देवता बनाना है।
भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं जैन समाज राघौगढ़ के मार्गदर्शक विजय कुमार जैन ने जानकारी दी है राघौगढ़ नगर में दस लक्षण महापर्व के अवसर पर दिनांक 16 सितंबर से 30 सितंबर तक 10 दिवसीय श्रमण संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में मुख्य विशेषता यह है कि चयनित 20 युवक जिनकी आयु 15 से 30 वर्ष है उन्हें 10 दिन के विद्याधर नाम देकर धर्म साधना कराई जाएगी। महाराष्ट्र,। दिल्ली, असम, उ.प्र., हरियाणा एवं मध्यप्रदेश के युवक विधाधर बन रहे है।इसके अलावा श्रमण संस्कार शिविर में लगभग 110 पुरुष महिला एवं युवा भाग ले रहे हैं इनमें दिल्ली,सागर, कुंभराज, जामनेर, सुसनेर, राघौगढ़ आदि के शिविरार्थी मुनि संघ के पावन सानिध्य में दस दिन धर्म साधना करेंगे।शिविर के दैनिक धार्मिक कार्यक्रम प्रातः 5:00 बजे से ध्यान की कक्षा से प्रारंभ होंगे एवं रात्रि 9:00 बजे तक निरंतर धर्म साधना चलेगी। शिविर के संयोजक निखिल राजा चौधरी एवं संस्कार जैन
हैं।
