बण्डा जहरीली शराब काण्ड - पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव को लिखा पत्र।
पूर्व मंत्री चौधरी बोले-‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ कागजों में,कलेक्टर-एसपी को तत्काल हटाया जाए।
स्वतंत्र न्यायिक जांच से ही खुलेगा जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क का राज।
सागर जिलें के बण्डा क्षेत्र में जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों एवं बड़ी संख्या में लोगों के अस्पतालों में उपचाररत होने की गंभीर दुखद घटना को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक अथवा प्रदेश स्तरीय उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।पूर्व मंत्री चौधरी ने कहा कि अवैध शराब एवं नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ सरकार की घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बावजूद सागर जिले में अवैध एवं जहरीली शराब का कारोबार जारी रहना गंभीर प्रशासनिक विफलता है।उन्होंने कहा कि लंबे समय से अवैध शराब की शिकायतें सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई,यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सागर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को तत्काल हटानें की मांग को दोहराते हुए कहा कि जिस प्रशासनिक व्यवस्था के रहते इतनी गंभीर घटना हुई,उसी व्यवस्था के अधीन जांच होने से जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।इसलिए पूरे प्रकरण की जांच जिला स्तर से हटाकर स्वतंत्र न्यायिक एजेंसी से कराई जाए। पत्र में श्री चौधरी ने कहा कि 7 एवं 8 सितंबर को बण्डा क्षेत्र के प्रभावित लोगों एवं मृतकों के परिजनों से मुलाकात के दौरान अवैध शराब के कारोबार से जुड़ी गम्भीर जानकारी भी सामनें आई हैं जिसकी भी सूक्ष्मता से जांच की जाना चाहिये।पूर्व मंत्री ने पुलिस अधीक्षक सागर द्वारा जहरीली शराब उत्तर प्रदेश से लाकर सप्लाई किए जाने के दावे पर भी सवाल उठाते हुए शराब के वास्तविक स्रोत,निर्माण, परिवहन,आपूर्ति एवं स्थानीय वितरण नेटवर्क की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
जांच अधिकारी को भी जांच से पृथक करने की मांग - श्री चौधरी ने घटना की जांच के लिए नियुक्त डिप्टी कलेक्टर व अनुविभागीय अधिकारी जैसीनगर नवीन सिंह ठाकुर को भी जांच से पृथक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि श्री ठाकुर पूर्व में लंबे समय तक शाहगढ़ में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पद पर पदस्थ रहे हैं और हाल ही में वहां से स्थानांतरित हुए हैं। ऐसे में उनकी पूर्व पदस्थापना को देखते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने शाहगढ़ में उनके पदस्थ रहने के पूरे कार्यकाल की भी जांच कराने की मांग की।
Fomepizole सहित जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता की जांच हो- श्री चौधरी ने जहरीली शराब से प्रभावित लोगों के उपचार के दौरान Fomepizole सहित आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने 5 सितंबर 2026 से संबंधित अस्पतालों के दवा स्टॉक, वितरण रजिस्टर, इंडेंट, खरीद संबंधी अभिलेख एवं मरीजों के उपचार रिकॉर्ड की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।उन्होंने कहा कि सागर जिले में पूर्व में भी बहेरिया,कैंट, मोतीनगर,मकरोनिया एवं गोपालगंज थाना क्षेत्रों में शराब बिक्री एवं अवैध गतिविधियों से संबंधित मामले और स्टिंग ऑपरेशन सामने आए हैं।इसके अलावा नरयावली थाना क्षेत्र के ग्राम मारा बड़ोदरा में अवैध शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़े जाने के बावजूद यदि अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय रहा,तो पुलिस,आबकारी एवं प्रशासन की भूमिका की भी जांच आवश्यक है।पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जहरीली शराब के निर्माण,परिवहन,बिक्री एवं वितरण से जुड़े लोगों के साथ-साथ संरक्षण एवं लापरवाही के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाए। मृतकों के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता, पीड़ितों को समुचित उपचार तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
