राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला
जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने के लिए दृढ़ निश्चयी एवं आत्मविश्वासी बनो।
मुनि श्रमण सागर जी।
राघौगढ़ 1 अक्टूबर।धर्म नगरी राघौगढ़ में पावन चातुर्मास वर्षा योग कर रहे आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने विद्यासागर सभागार में "जीवन के हर क्षेत्र में सफल कैसे हो" इस विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा आज हर व्यक्ति की एक समस्या है मन में एकाग्रता नहीं है। एकाग्रता के अभाव में अनेक समस्याएं पैदा होती हैं। आपने कहा जीवन के हर क्षेत्र में पारिवारिक,व्यापारिक, सामाजिक, शैक्षणिक, राजनैतिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने विभिन्न सूत्रों का उल्लेख किया। लक्ष्य निर्धारित करना, लक्ष्य का ज्ञान होना, लक्ष्य को पाने के लिए ललक होना, जो लक्ष्य बनाया है उस पर विश्वास होना,जो लक्ष्य निर्धारित किया है उस पर असफलता का भय न होना। लक्ष्य कैसे निर्धारित करें इसका सटीक उदाहरण देते हुए आपने कहा महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य ने जंगल में कौरव पांडवों से पूछा पेड़ पर क्या दिख रहा है सभी ने कहा पेड़ पर पत्ते, फल,पक्षी आदि दिख रहे हैं। अंत अर्जुन से पूछा तो अर्जुन ने उत्तर दिया पेड़ पर चिड़िया बैठी है, मुझे चिड़िया की आंख में मसूर का दाना दिख रहा है। आपने लक्ष्य प्राप्त करने के दृढ़ निश्चय का उदाहरण देते हुए कहा कर्नाटक में गोम्मटेश्वर में भगवान बाहुबली स्वामी की प्रतिमा जो कारीगर बना रहा था उसकी मां 6 माह तक उसे बिना नमक के भोजन कराती रही। जब मूर्ति बनाकर पूरी तैयार हो गई तब उस कारीगर को याद आया और अपनी मां से शिकायत की मां आज भोजन में नमक नहीं है। तब माताजी ने जवाब दिया बेटा भोजन में नमक तो 6 में से नहीं दे रही हूं। तुझे याद आज याद आया। हमने जो लक्ष्य निर्धारित किया है उस पर विश्वास होना इसका उदाहरण देते हुए आपने बताया जैन दर्शन में अंजन चोर की कथा आई है। आकाश गामिनी विद्या सिद्ध करने सेठ जी ने उसे जो णमोकार मंत्र का जाप देने की बात कही थी वह णमोकार मंत्र उसे याद नहीं रहा और उसने यह कहा आणम ताणम और कछु नहीं जानम, सेठ वचन परमाण, विश्वास पूर्वक इस मंत्र की सिद्धि से उसे आकाश गामिनी विद्या प्राप्त हुई और वह अंजन से निरंजन बन गया। जिनको खुद पर भरोसा नहीं है वह जीवन में कभी सफल नहीं हो सकता। जिनको असफलता का भय होता है वह भी जीवन में सफल नहीं हो सकते। हमने जो द्ढ़ निश्चय कर लिया है जो लक्ष्य बना लिया है उसमें असफलता का भय नहीं होना चाहिए। आपने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के कथन का उल्लेख करते हुए कहा लक्ष्य बनाओ समझदारी से उसे प्राप्त करने के लिए पागल हो जाओ, सफलता कदम चूमेगी।
अंत में मुनिराज जी ने कविता सुनाई "जल्दी में सब काम बिगड़ेंगे, जरा धीरज धरो।
