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एकीकृत उद्यानिकी मॉडल अपनाकर किसान बन रहे हैं आत्मनिर्भर

 एकीकृत उद्यानिकी मॉडल अपनाकर किसान बन रहे हैं आत्मनिर्भर


गुना  

गुना जिले में किसान आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों एवं अंतरवर्ती फसल पद्धति अपनाकर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। विकासखंड राधौगढ़ अंतर्गत ग्राम भैंसाना के कृषक श्री गणपत सिंह यादव द्वारा एक एकड़ में लौकी, भिंडी, गिलकी, खीरा, करेला एवं टमाटर की उन्नत अंतरवर्ती खेती की जा रही है। खेत में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग एवं स्टेकिंग तकनीकों के उपयोग से उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि हुई है।

कृषक श्री यादव ने बताया कि अंतरवर्ती फसल पद्धति से खेती में जोखिम कम होता है तथा विभिन्न फसलों से निरंतर आय प्राप्त होती रहती है। आधुनिक तकनीकों को अपनाकर वे प्रति एकड़ लगभग 5 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

उपसंचालक उद्यान श्री केपीएस किरार ने बताया कि विभाग की लगभग सभी योजनाओं पर किसानों को करीब 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ फार्मिंग सिस्टम में बदलाव लाकर पॉलीहाउस में गुलाब उत्पादन, नेट हाउस में सब्जी उत्पादन, ड्रिप पद्धति से खुले खेत में गुलाब, गेंदा आदि की खेती, थाई पिंक अमरूद का बगीचा, डेयरी फार्म, वर्मी कम्पोस्ट, फार्म पॉण्ड, मत्स्य पालन एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की।

वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी वि.ख. राधौगढ़ श्री कमल किशोर वर्मा ने किसानों से जल संरक्षण एवं कम लागत में अधिक उत्पादन हेतु ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के माध्यम से पानी की बचत के साथ फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन में भी वृद्धि होती है।

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