10 लक्षण पर्व के समापन पर
जैन समाज द्वारा भव्य जुलूस निकाला।
मुनि संघ ने विद्याधरों एवं शिविरार्थियों के साथ जंगल में साधना की। जैन विमान 27 सितंबर को
राघौगढ़ 25 सितंबर। जैन समाज के पवित्र दस लक्षण पर्व के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य के दिन राघौगढ़ में चातुर्मास कर रहे आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज ने उनके साथ पिछले 10 दिन से धर्म साधना कर रहे 20 विद्याधरों एवं 40 शिवरात्रियों ने प्रातः काल 6 बजे से शाम 5 बजे तक राघौगढ़ के समीप धीरपुर में जंगल में धर्म साधना की। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर मंगल प्रवचन करते हुए श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से पधारे अनिकेत शास्त्री जी ने कहा जैन धर्म के दह धर्मों में सबसे प्रमुख ब्रह्मचर्य है। ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए हमें कदम कदम पर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आपने कहा वर्तमान में पहनावे, श्रृंगार आदि से मन में विकार आते है। इन विकारों को रोककर धर्म साधना करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है।
आज प्रातः 6 बजे से भगवान का अभिषेक, शांति धारा, सामूहिक पूजन के साथ जैन धर्म के 12 वे तीर्थंकर भगवान बासुपूज्य स्वामी के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष में भगवान की विशेष पूजा अर्चना की गई। दोपहर में 2 बजे से जैन समाज द्वारा श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर से जल यात्रा का जुलूस प्रारंभ हुआ। जो नगर के प्रमुख मार्गो से होकर वापस विद्यासागर भवन में आया जहां पर भगवान का कलशाभिषेक शांति धारा एवं फुलमाल हुई । गत रात्रि में आचार्य विद्यासागर पाठशाला के नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में उत्साह से भाग लिया। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण जैन समाज के प्राचीन सम्राट थे। सम्राट समुद्रगुप्त मौर्य, सम्राट संप्रति, सम्राट कुमार पाल एवं रानी अकव्वा चौटा के अभिनय कर नन्हे मुन्ने बच्चों ने जैन समाज के प्राचीन गौरव का स्मरण कराया।
एक बात समझ के अध्यक्ष अशोक कुमार भारिल्य एवं मार्गदर्शन मंडल के वरिष्ठ सदस्य भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक विजय कुमार जैन ने बताया है आगामी
27 सितंबर रविवार को राघौगढ़ नगर में प्रति वर्षानुसार जैन विमानोत्सव का धार्मिक आयोजन किया। जयपुर से बनकर आये विमान जी में भगवान को विराजमान कर शोभा यात्रा निकाली जाएगी।
