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संसार में पति का पतन से रोके वह धर्म पत्नी कहलाती है। मुनि श्रमण सागर जी

 राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला 

संसार में पति का पतन से रोके वह धर्म पत्नी कहलाती है। मुनि श्रमण सागर जी 


राघौगढ़ 3 अक्टूबर। दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने राघौगढ़ में जारी श्रमण धारा प्रवचन माला में आज "आदर्श धर्मपत्नी कैसी हो" इस विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा जो पति का पतन करे वह पत्नी कहलाती है। संसार में पति को पतन के मार्ग पर जाने से रोके वह धर्मपत्नी कहलाती है। आपने उदाहरण देते हुए बताया जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर की मौसी रानी चेलना थी, उन्होंने अपने पति राजा श्रेणिक को प्रयास पूर्वक धर्म मार्ग पर लगाया और वह कल्याण की ओर बढ़ गये। महा सती सीता, अंजना, द्रौपदी आदि की अमर गाथाएं आज भी हम आदरपूर्वक सुनते हैं।मुनिराज ने संसार में चार प्रकार की धर्मपत्नियों का उल्लेख करते हुए कहा पहली सुंदर भी नहीं होती है एवं कुशल भी नहीं होती है। दूसरी सुंदर तो है मगर कुशल नहीं है। तीसरी सुंदर नहीं है कुशल हैं। चौथी वह होती हैं वह सुंदर भी हैं सुशील भी है और कुशल भी है। आपने कहा पत्नियों की भरमार तो दुनिया में है। मगर सुंदर सुशील एवं कुशल ग्रहणी ही धर्मपत्नी कहलाती है। ऐसी धर्मपत्नियां उंगली पर गिरने लायक हैं। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा पश्चाताप संस्कृति के प्रभाव में पति-पत्नी दोनों नौकरी कर रहे हैं घर पर भोजन नहीं बना रहे हैं होटल का भोजन कर रहे हैं। पढ़ाई करते प्रेम प्रसंग कर विवाह करते हैं एवं सात जन्म तक साथ निभाने का वायदा करते हैं। ऐसे वैवाहिक संबंध मात्र 6 महीने भी नहीं चल पाते हैं ऐसे प्रकरणों के वैवाहिक संबंध विच्छेद प्रकरण हजारों की संख्या में देश की न्यायालयों में विचाराधीन है। भारतीय संस्कृति में आदर्श धर्मपत्नी उसे कहते हैं सुंदरता के साथ-साथ उसमें मन में भी निर्मलता हो कुशल इतनी हो कि गृह कार्य में दक्षता के साथ-साथ परिवार को साथ लेकर चले। अपनी संतानों को संस्कारवान बनाये। एक जमाना था जब पति परिवार का वित्त मंत्री होता था और धर्म पत्नी गृह मंत्री होती थी। हम भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को भूल गए हैं।अब स्थिति यह बन रही है कि विदेशों में भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को अपनाया जा रहा है। अकेले अमेरिका के ही आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में औसतन डेढ़ हजार परिवार प्रतिदिन भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं। आपने कहा पैसे से घर भव्य होता है। प्रेम से घर सभ्य होता है।

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